२०२०-०९-२४

गीतानुवाद-१७३: एक रात में दो दो चाँद खिले

मूळ हिंदी गीतः राजिंदर क्रिशन, संगीतः चित्रगुप्त श्रीवास्तव, गायकः लता मंगेशकर, मुकेश
चित्रपटः बरखा, सालः १९५९, भूमिकाः जगदीप, नंदा, अनंतकुमार 

मराठी अनुवादः नरेंद्र गोळे २००८०५२८

धृ

एक रात में दो दो चाँद खिले
एक रात में दो दो चाँद खिले
एक घूंघट में, एक बदली में
अपनी अपनी मंझिल से मिले
एक घूंघट में एक बदली में

एका रात्रीत चंद्रमे दोन कसे
एका रात्रीत चंद्रमे दोन कसे
पदरात आणि ढगाआड असे
आप-आपल्या साध्याशी वसे
पदरात आणि ढगाआड असे

१

बदली का वो चाँद तो सबका है
घूंघट का वो चाँद तो अपना है
मुझे चाँद समझने वाले बता
ये सच है या एक सपना है
एक रात में दो दो चाँद खिले

ढगाआडचा चंद्र सर्वांचा असे
पदरात परी आपलाच वसे
वद, चंद्र समजणार्‍या तू मला
की हे सत्य असे वा स्वप्न असे
एका रात्रीत चंद्रमे दोन कसे

२

मालूम नहीं दो अन्जाने
राही कैसे मिल जाते हैं
फूलों को अगर खिलना हो
वीराने में भी खिल जाते हैं
एक रात में दो दो चाँद खिले

अनोळखी दो, मला न कळे
भेटती मार्गातील पथिक कसे
फुलायचे जर फुलांना असेल
वैराण जागीही फुलती फुले
एका रात्रीत चंद्रमे दोन कसे


https://www.youtube.com/watch?v=m2-Dg3DrHx4

२०२०-०९-२२

गीतानुवाद-१७२: तेरे सुर और मेरे गीत

मूळ हिंदी गीतः हसरत, संगीतः वसंत देसाई, गायीकाः लता
चित्रपटः गुंज उठी शहनाई, साल: १९५९, भूमिकाः राजेंद्र कुमार, अमित, अनिता गुहा 

मराठी अनुवादः नरेंद्र गोळे २००८०५०४

धृ

तेरे सुर और मेरे गीत
दोनो मिल कर बनेगी प्रीत

तुझे सुर आणि माझे गीत
दोन्ही मिळुन पूर्ण होईल प्रीत

१

धड़कन में तू है समाया हुआ
आ आ आ आ
खयालों में तू ही तू छाया हुआ
दुनिया के मेले में लाखों मिले
आ आ आ आ
दुनिया के मेले में लाखों मिले
मगर तू ही तू दिल को भाया हुआ
मैं तेरी जोगन तू मेरा मीत

हृदयस्पंदने व्यापुनी राहसी
आ आ आ आ
विचारांतही तूच तू राहसी
दुनियेच्या जत्रेत लाखो, परी
आ आ आ आ
दुनियेच्या जत्रेत लाखो, परी
रुचसी मनाला, हृदी राहसी
मी रे प्रिया तव, तू माझा खचित

२

मुझको अगर भूल जाओगे तुम
आ आ आ आ
मुझसे अगर दूर जाओगे तुम
मेरी मुहब्बत में तासीर है
आ आ आ आ
मेरी मुहब्बत में तासीर है
तो खींच के मेरे पास आओगे तुम
देखो हमारी होगी जीत

विसरून मला जर का जाशील तू
आ आ आ आ
मजपासूनी दूर जाशील जर तू
प्रेमात माझ्या आहे शक्ती अशी
आ आ आ आ
प्रेमात माझ्या आहे शक्ती अशी
की ओढीने येशील पुन्हा मजप्रती
पाहा राजसा आपली हीच जीत

 

 

https://www.youtube.com/watch?v=ljG6atDKyxo

२०२०-०९-२१

गीतानुवाद-१७१: सारे जहाँ से अच्छा

 सारे जहाँ से अच्छा

( तराना-ए-हिंदी )


बाँग
-ए-दरा, भाग-१, १९०५, मूळ हिंदी गीतः इक्बाल, संगीतः रवी, गायकः सोना ठाकूर

चित्रपटः अपना घर, सालः १९६०, भूमिकाः प्रेमनाथ, श्यामा, नंदा, लीला मिश्रा

मराठी अनुवाद: नरेंद्र गोळे २००९०१२२

 

धृ

सारे जहाँ से अच्छा हिन्दोस्ताँ हमारा
हम बुलबुलें हैं इसकी यह गुलिसताँ हमारा

सार्‍या जगात सच्चा भारत हा देश आमचा
आम्ही देशभक्त सारे रहिवास हाच आमचा

१

गुरबत में हों अगर हम रहता है दिल वतन में
समझो वहीं हमें भी दिल हो जहाँ हमारा
परबत वो सबसे ऊँचा मसाया आसमाँ का
वो संतरी हमारा वो पासबाँ हमारा

फिरता आम्ही विदेशी मन भारतात राहे
समजा आम्हा तिथेची मन राहते जिथे हे
सर्वोच्च पर्वतच तो आकाशीचा सखा की
पहार्‍यास तोच आमच्या सहार्‍यास तोच राहे

२

गोदी में खेलती हैं जिसकी हज़ारों नदियाँ
गुलशन है जिसके दम से रश्क-ए-जिनाँ हमारा
ऐ आब-ए-रौंद-ए-गंगा वो दिन है याद तुझको
उतरा तेरे किनारे जब कारवाँ हमारा

खेळती कडेवरती ज्याच्या नद्या हजारो
फुलते हे राष्ट्रजीवन त्या वैभवी जयाच्या
स्मरतो का दिन तुला तो गंगौघा सांग मज तू
तुझिया तीरी उतरला होता थवाच आमचा

३

मजहब नहीं सिखाता आपस में बैर रखना
हिन्दी हैं हम वतन हैं हिन्दोस्ताँ हमारा
यूनान मिस्र रोमाँ सब मिट गए जहाँ से
अब तक मगर है बाकी नाम-ओ-निशाँ हमा

शिकवत न धर्म कुठला आपसांत वैर धरणे
हिंदी असू आम्ही अन् भारत हा देश आमचा
चीनी इजिप्ती रोमन कुणीही न शेष बाकी
अजूनही दिगंत राहे सन्मान भारताचा

४

कुछ बात है कि हस्ती मिटती नहीं हमारी
सदयों रहा है दुश्मन दौर-ए-जहाँ हमारा
'इक्बाल' कोई मरहूम अपना नहीं जहाँ में
मालूम क्या किसी को दर्द-ए-निहाँ हमारा

काही असे खचितच सुगी आमची सरेना
जरी राहिले जगच हे शत्रू बनून आमचा
'इक्बाल' साथी कुणी ना जगी आपला दिसे ह्या
कोणास ज्या कळावे सल कोणता हृदी ह्या

 

https://www.rekhta.org/nazms/taraana-e-hindii-saare-jahaan-se-achchhaa-hindostaan-hamaaraa-allama-iqbal-nazms?lang=hi