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२०२१-०८-१०

गीतानुवाद-२२२: लग जा गले

मूळ हिंदी गीतकारः राजा मेहंदी अली खान, संगीतः मदनमोहन, गायीकाः लता
चित्रपटः वह कौन थी, सालः १९६३, भूमिकाः मनोजकुमार, साधना 

मराठी अनुवादः नरेंद्र गोळे २००७०८१५

धृ

लग जा गले कि फिर ये हसीं रात हो न हो
शायद फिर इस जनम में मुलाक़ात हो न हो

जवळी मला धरी ही रात्र ये न ये पुन्हा
बहुधा न होऊ दे या जन्मी भेटही पुन्हा

हमको मिली हैं आज, ये घड़ियाँ नसीब से
जी भर के देख लीजिये हमको क़रीब से
फिर आपके नसीब में ये बात हो न हो

हाती मिळाली आज ही घटिका सुदैवाने
जवळून घे बघून मनसोक्त तू सुखे
मग आपल्या नशीबी हे सुख ये न ये पुन्हा

पास आइये कि हम नहीं आएंगे बार-बार
बाहें गले में डाल के हम रो लें ज़ार-ज़ार
आँखों से फिर ये प्यार कि बरसात हो न हो

ये जवळ न मी पुन्हा येणार वारंवार
घालुन गळा गळ्यात रडू आज धायधाय
डोळ्यांतूनी हे प्रेम बरसो न वा पुन्हा

 https://www.youtube.com/watch?v=TFr6G5zveS8