मूळ हिंदी गीतकारः साहीर, संगीतकारः रवी, गायीकाः लता, मुकेश
चित्रपटः आँखे, सालः १९६८, भूमिकाः माला सिन्हा, धर्मेंद्र
नरेंद्र गोळे २०१२०४२१
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धृ |
हर तरह के जज़्बात का
ऐलान हैं आँखें |
हर भावनेचा, भावाचा, उच्चार हे डोळे |
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१ |
आँखों से बड़ी कोई तराज़ू
नहीं होती |
डोळ्यांहून उजवा नसे तराजूही कुठला |
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२ |
आँखें ही मिलाती हैं
ज़माने में दिलों को |
डोळेच गाठ घालती, मनांची संसारी या |
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३ |
लब कुछ भी कहें उससे
हक़ीक़त नहीं खुलती |
ओठ बोलले, तरी सत्य उमगत नाही |
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४ |
आँखें न झुकें तेरी किसी
ग़ैर के आगे |
परक्यापुढे अवनत न होवो तुझे डोळे |
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५ |
उस मुल्क़ की सरहद को
कोई छू नहीं सकता |
त्या देशाच्या हद्दीस कुणी स्पर्शू शके ना |