मूळ मराठी गीतकारः अनिल भारती, संगीतः गजानन वाटवे, गायकः गजानन वाटवे
हिंदी अनुवाद: नरेंद्र गोळे २००७०३२८
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प्रीतीची आसवे पत्थरात पाझरली तो सलीम राजपुत्र नर्तकी अनारकली |
पत्थ्थर में झर लिए प्रीती के आसू भी वो सलीम राजपुत्र, नर्तकी अनारकली |
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१ |
अनोळखी शिपाईगड्या एकदाच पाहिले शूराच्या चरणावर मस्त हुस्न
वाहिले इष्काच्या दरबारी चांदरात बरसली तो सलीम राजपुत्र नर्तकी अनारकली |
अन्जान इक सिपाही को देखा एकबार था शूर के चरण में तबही मस्त हुस्न झुक लिया वो सलीम राजपुत्र, नर्तकी अनारकली |
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२ |
बंड करून उठली तलवार सलीमाची राजनिष्ठ, राजबीज आस मोंगलांची अकबरच्या न्यायकसोटीस प्रीत उतरली तो सलीम राजपुत्र नर्तकी अनारकली |
कर बगावत उठी तरवार वो सलीम की राजनिष्ठ, राजबीज आस मोंगलों की अकबर के न्यायनिकष पर भी प्रीत कस ली वो सलीम राजपुत्र, नर्तकी अनारकली |
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३ |
ते शराबी नयन कधी कुणा नाही डरले राजा वा रयतेला ना कधीच घाबरले मिलनाच्या वाटेवर भिंत जरी बांधली तो सलीम राजपुत्र नर्तकी अनारकली |
वो शराबी नयन कभी डरे ना किसीसे राजा या रंक से वो कभीभी ना डरे मिलन की राह में दीवार क्यूँ न बाँध ली वो सलीम राजपुत्र, नर्तकी अनारकली |
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४ |
अल्लाच्या दरबारी दोन पाखरे जुळी पंख मिटून मूकपणे चढली एका सुळी तो पतंग ती शमा एकसाथ जाळली तो सलीम राजपुत्र नर्तकी अनारकली |
साथसाथ दो पंछी जुल्म को सहते रहे पर मिट के साथसाथ, सुलीपर भी चढ गये नामशेष वो पतंग, वो शमा भी रह गई वो सलीम राजपुत्र, नर्तकी अनारकली |