मूळ ऊर्दू गझलः अहमद फराज, गायकः मेहदी हसन, सालः १९७२
मराठी अनुवादः नरेंद्र गोळे २०२६०६०९
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धृ |
रंजिश ही सही
दिल ही दुखाने के लिये आ |
नाखुशीने का होईना मन मोडण्यास ये |
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१ |
पहले से मरासिम न
सही फिर भी कभी तू |
पूर्वीचे न संबंध काही तरीही कधी तू |
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२ |
किस किस को बतायेंगे
जुदाई का सबब हम |
कुणा कुणास सांगू मी विरहाची कारणे |
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३ |
कुछ तो मेरे पिन्दार-ए-मुहब्बत
का भरम रख |
काही तरी प्रेमाची माझ्या तू राख लाज ग |
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४ |
एक उम्र से हूं लज़्ज़त-ए-गिरिया
से भी मह्रूम |
क्रंदनानंदापासूनही कधीचाच मी वंचित |
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५ |
अब तक दिल-ए-खुष-फ़ेहम
को हैं |
आजवर समजदार मना |
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६ |
माना की मुहब्बत
का छुपाना है मुहब्बत |
मानले की लपवणे प्रीतीस, खरी प्रीत |
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७ |
जैसे तुम्हे आते
हैं न आने के बहाने |
येतात बहाणे तुला, न येण्याचे नेहमी |
रंजिश: अनिमोसिटी, शत्रुत्व, तिरस्कार
मरासिम: रिलेशनशिप; संबंध
रस्म-ओ-रहे दुनिया: रिवाज, मॅनर्स, ट्रडिशन्स ऑफ़ द वर्ल्ड
पिन्दार-ए-मुहब्बत: लव्हज प्राईड, प्रेमाची आबरू
लज़्ज़त-ए-गिरिया: जोय ओफ़ क्राईंग, क्रंदनानंद;
मह्रूम: डिव्हॉईड, वंचित;
राहत-ए-जाँ: कम्फ़ोर्ट ऑफ़ द सोउल, आत्मानंद, मनोरमे
दिल-ए-खुष-फ़ेहम: अंडरस्टँडिंग हार्ट, समजदार मन;
शम्में: लाईट्स, दिवे
बहाने: एक्स्क्युजेस, सबबी, बहाणे