मूळ हिंदी
गीतः मजरूह सुलतानपुरी, संगीतकार:
रोशन, गायक: लता
मंगेशकर
चित्रपट:
ममता, सालः १९६६, भूमिकाः सुचित्रा सेन, अशोककुमार
मराठी
अनुवादः नरेंद्र गोळे २०२५०५२३
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धृ
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रहते थे कभी जिनके दिल में हम जान से भी प्यारों की तरह बैठे हैं उन्ही के कूचे में हम आज गुनहगारों की तरह
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राहे कधी ज्यांचे हृदयी
मी प्राणप्रिय आप्तासमची मी बसले मी बैठकीत त्यांच्याचि जणू आज बनुनी अपराधी
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१
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दावा था जिन्हें हमदर्दी का खुद आके न पूछा हाल कभी महफ़िल में बुलाया है हम पे हँसने को सितमगारों की तरह
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होती सहानुभूती तर का माझे पुसले ना हाल कधी मैफलीत बोलावले मजला दोषी गणुनी हसण्याकरता
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२
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बरसों के सुलगते तन मन पर अश्कों के तो छींटे दे ना सके तपते हुए दिल के ज़ख्मों पर बरसे भी तो अंगारों की तरह
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वर्षांच्या धधगत्या काळावर अश्रूंचे तुषारहि देऊ न शकले तापल्या मनाच्या जखमांवर बरसलेही निखारे जणू वरुनी
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३
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सौ रुप धरे जीने के लिये बैठे हैं हज़ारों ज़हर पिये ठोकर ना लगाना हम खुद हैं गिरती हुई दीवारों की तरह
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शत रूप धरून जगण्याकरता बसले मी हजारो पिऊन विषे लाथाडू नका मी आज असे ढासळत्या भिंतींपरी राशी
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