मूळ हिंदी गीतः राजिंदर क्रिशन, संगीतः चित्रगुप्त श्रीवास्तव, गायकः लता मंगेशकर, मुकेश
चित्रपटः बरखा, सालः १९५९, भूमिकाः जगदीप, नंदा, अनंतकुमार
मराठी अनुवादः नरेंद्र गोळे २००८०५२८
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धृ
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एक रात में दो दो चाँद खिले एक रात में दो दो चाँद खिले एक घूंघट में, एक बदली में अपनी अपनी मंझिल से मिले एक घूंघट में एक बदली में
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एका रात्रीत चंद्रमे दोन कसे एका रात्रीत चंद्रमे दोन कसे पदरात आणि ढगाआड असे आप-आपल्या साध्याशी वसे पदरात आणि ढगाआड असे
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१
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बदली का वो चाँद तो सबका है घूंघट का वो चाँद तो अपना है मुझे चाँद समझने वाले बता ये सच है या एक सपना है एक रात में दो दो चाँद खिले
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ढगाआडचा चंद्र सर्वांचा असे पदरात परी आपलाच वसे वद, चंद्र समजणार्या तू मला की हे सत्य असे वा स्वप्न असे एका रात्रीत चंद्रमे दोन कसे
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२
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मालूम नहीं दो अन्जाने राही कैसे मिल जाते हैं फूलों को अगर खिलना हो वीराने में भी खिल जाते हैं एक रात में दो दो चाँद खिले
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अनोळखी दो, मला न कळे भेटती मार्गातील पथिक कसे फुलायचे जर फुलांना असेल वैराण जागीही फुलती फुले एका रात्रीत चंद्रमे दोन कसे
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