मूळ हिंदी गीतः साहीर, संगीतः रवी, गायिकाः लता
चित्रपटः आँखे, सालः १९६८, भूमिकाः माला सिन्हा, धर्मेंद्र
मराठी अनुवादः नरेंद्र गोळे २००८०५३१
|
॥
धृ
॥
|
मिलती है ज़िंदगी में मोहब्बत कभी-कभी
होती है दिल्बरों की इनायत कभी-कभी
|
मिळते रे जीवनात ही प्रीती कधी-कधी
होते रे प्रियाची बहाल मर्जी कधी-कधी
|
|
॥
१
॥
|
शर्मा के मुँह न फेर नज़र के सवाल पर
लाती है ऐसे मोड़ पर क़िस्मत कभी-कभी
|
नेत्रीच्या प्रश्नावर नको लाजून फिरवू मुख
वळणावर आणते अशा, दैवही कधी कधी
|
|
॥
२
॥
|
खुलते नहीं हैं रोज़ दरिचे बहार के
आती है जान-ए-मन ये क़यामत कभी-कभी
|
उलगडती रोज ना मुळी बहारीचे गालीचे
येते ही जिवलगा पहा पर्वणी कधी कधी
|
|
॥
३
॥
|
तनहा न कट सकेंगे जवानी के रास्ते
पेश आएगी किसीकी ज़रूरत कभी-कभी
|
ना एकट्याने यौवनी, पथ संपतो कधी
संगत जरूर भासते कुणाची कधी कधी
|
|
॥
४
॥
|
फिर खो न जाएं हम कहीं दुनिया की भीड़ में
मिलती है पास आने की मुहलत कभी-कभी
|
गर्दीत आपली ह्या पुन्हा होवो न ताटातूट
मिळते रे जवळ येण्याची सवलत कधी कधी
|
|
॥
५
॥
|
होती है दिलबरों की इनायत कभी-कभी
मिलती है ज़िंदगी में मोहब्बत कभी कभी
|
होते रे प्रियाची बहाल मर्जी कधी-कधी
मिळते रे जीवनात ही प्रीती कधी-कधी
|