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२०१५-०५-११

गीतानुवाद-०३०: प्यार की आग में

मूळ हिंदी गीतः हसरत जयपुरी, संगीतः सचिनदेव बर्मन, गायकः मन्ना डे
चित्रपटः जिद्दी, सालः १९६४, भूमिकाः मेहमूद, शुभा खोटे

मराठी अनुवादः नरेंद्र गोळे २०१५०५११



प्यार की आग में तन बदन जल गया
प्रेमाच्या वन्हीने देह हा करपला



प्रस्ताव
दुनिया बनाने वाले सुन ले मेरी कहानी
रोये मेरी मोहोब्बत तडपे मेरी जवानी
विश्वकर्म्या जरा ऐक माझी कथा
रडतसे प्रेम हे तळमळे तरूणता

॥धृ॥
प्यार की आग में तन बदन जल गया
जाने फिर क्यों जलाती हैं दुनिया मुझे
प्रेमाच्या वन्हीने देह हा करपला
का पुन्हा जाळते जग तरीही मला

॥१॥
मैं तो रोता फिरूँ बादलों की तरह
ठंडी आहे भरूँ पागलों की तरह
जाने फिर क्यों रुलाती हैं दुनिया मुझे
मी रडतच फिरू का ढगांच्या परी
श्वास मी थंड हे सोडू वेड्यापरी
का तरीही ही दुनिया रडवे मला

॥२॥
बात जब मैं करूँ मुँह से निकले धुँआ
जल गया जल गया मेरे दिल का जहाँ
जाने फिर क्यों सताती हैं दुनिया मुझे
बोलू मी लागता धूर उमटे कसा
जळले रे, जळले रे, पेटले विश्व ना
का तरीही ही दुनिया सतवे मला

॥३॥
इष्क मुझको नचाता रहा हैं सदा
क्या क्या सपने सिखाता रहा हैं सदा
जाने फिर क्यों नचाती हैं दुनिया मुझे
नाचविते सदा प्रेम हे का मला
स्वप्ने रंगीत हे दाखवे का मला
का पुन्हा नाचवे जग तरीही मला