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२०१५-०६-१०

गीतानुवाद-०४४: निगाहें मिलाने को

मूळ हिंदी गीतकार: साहिर लुधियानवी, संगीत: रोशन, गायीका: आशा
चित्रपट: दिल ही तो है, साल: १९६३, भूमिका: राज कपूर, नूतन

मराठी अनुवाद: नरेंद्र गोळे २००७०७०४


प्र
स्ता
राज़ की बात है
मेहफ़िल में, कहें या न कहें
बस गया है कोई, इस दिल में
कहें या न कहें
गुपित हे अंतरीचे,
मैफिलीत सांगू की नको
अंतरी वसतो कुणी ह्या,
मी उघड सांगू की नको

धृ
निगाहें मिलाने को जी चाहता है
दिल-ओ-जां लुटाने को जी चाहता है
कटाक्षा कटाक्षांनी मन भेटू पाहे
प्राण अन् शरीरा ते ओवाळू पाहे


वो तोहमत जिसे इश्क़ कहती है दुनिया
वो तोहमत उठाने को जी चाहता है
तो आळ ज्या प्रेम म्हणते ही दुनिया
तो आळ घेण्यास मन चाहते हे


किसी के मनाने में लज़्ज़त वो पायी
कि फिर रूठ जाने को जी चाहता है
मजा जी, कुणाच्या मनधरणीत होती
रुसून, ती पुन्हा चाहे घेण्यास, मन हे


वो जलवा जो ओझल भी है सामने भी
वो जलवा चुराने को जी चाहता है
जो डौल अस्पष्ट, कधी स्पष्ट होई
तो आपलासा, मन करू पाहते हे


जिस घड़ी मेरी निगाहों को तेरी दीद हुई
वो घड़ी मेरे लिये ऐश की तमहीद हुई
जब कभी मैंने तेरा चाँद सा चेहरा देखा
ईद हो या कि न हो मेरे लिये ईद हुई
ज्या क्षणी दृष्टीस, तुझी मूर्ती आली
सीमा तत्क्षणी मम सुखाची झाली
कधीही तुझा चंद्रसा चेहरा पाहता
असो ईद, नसताही मज ईद झाली

मुलाक़ात का कोई पैग़ाम दीजिये की
छुप छुपके आने को जी चाहता है
और आके न जाने को जी चाहता है
और आके न जाने को जी चाहता है
संकेत कसलासा, दे मिलनाचा की
लपून छपून येण्यास मन चाहते हे
येऊन न जाण्यास मन चाहते हे
येऊन न जाण्यास मन चाहते हे