मूळ
हिंदी गीतः शैलेन्द्र, संगीतः सलील चौधरी, गायकः मुकेश
चित्रपटः मधुमती,
सालः १९५८, भूमिकाः दिलीपकुमार, वैजयंतीमाला
मराठी
अनुवादः नरेंद्र गोळे २०२००७२५
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धृ
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सुहाना सफर और ये मौसम हंसीं
हमें डर है, हम खो
न, जाएं कहीं
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हवासा सफर, साजरा हा ऋतू
असा का मला, पाहतो मोहवू
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१
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ये कौन हँसता है फूलों में छूप कर
बहार बेचैन है किसकी धुन पर
कहीं गुमगुम, कहीं रुमझुम
के जैसे नाचे ज़मीं
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हे कोण हसते आहे फूलांत हरवून
बहार अस्वस्थ कोणात गुंतून
कुठे गुपचूप, कुठे रुमझुम
जणु ही नाचे जमीन
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२
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ये गोरी नदियों का चलना उछलकर
के जैसे अल्हड़ चले पी से मिलकर
प्यारे प्यारे ये नज़ारे
निखरे हैं हर कहीं
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नदी उसळत ही, चाले अशी का
प्रियासोबत ही अल्लड पळे का
हवे हवेसे, हे नजारे
उजळलेले इथे
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३
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वो आसमाँ झुक रहा है ज़मीं पर
ये मिलन हमने देखा यहीं पर
मेरी दुनिया, मेरे सपने
मिलेंगे शायद यहीं
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हे झुकते आकाश जणु या भुईवर
हे मिलन पाहिले मी इथेच तर
माझी दुनिया, माझी स्वप्ने
बहुधा मिळतील इथेच
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