मूळ हिंदी गीत: कमर जलालाबादी, संगीत: कल्याणजी-आनंदजी, गायक: मुकेश
चित्रपट: हिमालय की गोद मे, साल: १९६५, भूमिका: माला सिन्हा, मनोजकुमार, शशीकला
मराठी अनुवाद: नरेंद्र गोळे २००६१००१
मैं तो एक ख्वाब हूँ
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मी तर एक स्वप्नवत्
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॥धृ॥
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मैं तो एक ख्वाब हूँ,
इस ख्वाब से तू प्यार न कर
प्यार हो जाए तो,
फिर प्यार का इज़हार न कर
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मी तर एक स्वप्नवत्,
ह्या स्वप्नावर तू प्रेम न कर
प्रेम जडले तरी,
त्या प्रेमाचा उच्चार न कर
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॥१॥
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ये हवाएं सभी
चुपचाप चली जाएंगी
लौट कर फिर कभी
गुलशन में नहीं आएंगी
अपने हाथों में हवाओं को
गिरफ़्तार न कर
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ही हवा सारी
विनाशब्द, रवाना होईल
कधी परतून पुन्हा,
ह्या उपवनी ना मग येईल
कैद आपल्याच हातांनी,
ह्या हवेला तू न कर
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॥२॥
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शाख से टूट के गुन्चे भी
कभी खिलते हैं
रात और दिन भी ज़माने में
कहीं मिलते हैं
भूल जा जाने दे तक़दीर से
तक़रार न कर
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तोडूनही फांदीहून, पुष्पेही
फुलती का कधी
रात्र अन् दिवसही मिळतात,
जगीही का कधी
विसर, सोडून दे, नशीबाकडे
तक्रार न कर
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