मूळ हिंदी गीतः साहिर,
संगीतः रोशन, गायकः रफी,
लता
चित्रपटः भीगी रात,
सालः १९६५, प्रदीपकुमार, मीना कुमारी, अशोककुमार
मराठी अनुवादः नरेंद्र गोळे २०१००११९
|
धृ
|
दिल जो ना कह सका वोही राज़-ए-दिल कहने की
रात आई
|
गूज, जे न उमटले ते मनाचे गूज आता, वदण्याची रात आली
|
|
१
|
नग़मा सा कोई जाग उठा
बदन में झंकार की सी थरथरी
है तन में हो, प्यार की इन्हीं धड़कती धड़कती फ़िज़ाओं में रहने
की रात आई
|
गाणे कोणतेसे जागले शरीरी तार छेडिली जणू कुणी अंतरीची हो, प्रेमाच्या या स्पंदत्या स्पंदत्या बहारीतच, राहण्याची रात आली
|
|
२
|
तौबा ये किस ने
अंजुमन सजा के टुकड़े किये हैं गुंच-ए-वफ़ा के उछालो गुलों के
टुकड़े के रंगीं फ़िज़ाओं में
रहने की रात आई
|
पाहा हे कुणी या मैफलीस सजवून तुकडे केले ह्या प्रीतीच्या फुलांचे उधळा आता हे तुकडे की रंगीत बहारीतच राहण्याची रात आली
|
|
३
|
चलिये मुबारक ये जश्न
दोस्ती का दामन तो थामा आप ने
किसी का हो, हमें तो खुशी यही है तुम्हें भी किसी को
अपना कहने की रात आई
|
ठरो मैत्रीचा हा सोहळा शुभंकर हात तू कुणाचा तरी, हाती घेतलास मला तर खुशी असे ही तुलाही कुणास आपला म्हणण्याची रात आली
|
|
४
|
सागर उठाओ दिल का
किस को ग़म है आज दिल की क़ीमत जाम
से भी कम है पियो चाहे खून-ए-दिल हो के पीते पिलाते ही
रहने की रात आई
|
करा पेयपाने, मन मोडणे न दुःखद आज सुरेहूनही मना कमी किंमत प्या, जरी असो ते रक्त ईप्सिताचे की पीत आणि पाजतच राहण्याची रात आली
|
|
५
|
अब तक दबी थी एक मौज-ए-अरमाँ लब तक जो आई बन गई
है तूफ़ाँ हो, बात प्यार की बहकती बहकती निगाहों से
कहने की रात आई
|
आजवरच्या सूप्त इच्छेचा प्रवाह मुखावरती येता उमटले हे वादळ हो, गोष्ट प्रेमाचीच ढळत्या, ढळत्या कटाक्षांनी वदण्याची रात आली
|
|
६
|
ग़ुज़रे न ये शब खोल
दूँ ये ज़ुल्फ़ें तुमको छुपा लूँ मूँद
के ये पलकें हो, बेक़रार सी लरज़ती लरज़ती सी छाँवों में
रहने की रात आई
|
सरो ना ही रात, मोकलू हे केस डोळे मिटू का मी साठवून चित्र हो, अस्वस्थशा बुजर्या बुजर्या सावलीतच, राहण्याची रात आली
|
https://www.youtube.com/watch?v=3EDPAe4P2EY रफी
https://www.youtube.com/watch?v=IFEwzBJlpb4 लता