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२०२२-११-३०

गीतानुवाद-२५५: जाने क्यों लोग मुहब्बत

मूळ हिंदी गीतकारः आनंद बख्शी, संगीतः लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल, गायिकाः लता
चित्रपटः मेहबूब की मेहंदी, सालः १९७१, भूमिकाः राजेश खन्ना, लीना चंदावरकर, प्रदीपकुमार 

मराठी अनुवादः नरेंद्र गोळे २००७१२१६

धृ

इस ज़माने में इस मोहब्बत ने
कितने दिल तोड़े कितने घर फूँके
जाने क्यों लोग मुहब्बत किया करते हैं
दिल के बदले दर्द--दिल लिया करते हैं
जाने क्यों लोग मुहब्बत किया करते हैं

ह्या जगामध्ये, प्रेमपाशाने
किती मने तुटली, किती घरे जळली
जाणे का लोक तरीही प्रेम करतात
हृदय देऊनी का बदली दुःख घेतात
जाणे का लोक तरीही प्रेम करतात

तन्हाई मिलती है, महफ़िल नहीं मिलती
राहें मुहब्बत में कभी मन्ज़िल नहीं मिलती
दिल टूट जाता है, नाकाम होता है
उल्फ़त में लोगों का यही अन्जाम होता है
कोई क्या जाने, यूँ ये परवाने
क्यों मचलते हैं, ग़म में जलते हैं
आहें भर भर के दीवाने जिया करते हैं
जाने क्यों लोग मुहब्बत किया करते हैं

विरहच नशिबी येतो, मैफिल मिळत नाही
वाटेवर प्रीतीच्या, सफलता मिळत नाही
मन मोडुनी जाते, नाकाम ते होते
संकटात लोकांचे भवितव्य ते ठरते
कोण का जाणे, असे पतंग सारे
का उसळतात, दु:खी जळतात
सुस्कारे टाक-टाकून खुळे  जगतात
जाणे का लोक तरीही प्रेम करतात

सावन में आँखों को, कितना रुलाती है
फ़ुरक़त में जब दिल को किसी की याद आती है
ये ज़िन्दगी यूँ ही बरबाद होती है
हर वक़्त होंठों पे कोई फ़रियाद होती है
ना दवाओं का नाम चलता है
ना दुआओं से काम चलता है
ज़हर ये फिर भी सभी क्यों पिया करतें हैं
जाने क्यों लोग मुहब्बत किया करते हैं

श्रावणात डोळ्यांना, कितीतरी रडवते ती
विरहात सय जेव्हा मनालाही कुणाची ये
आयुष्य असे हे, व्यर्थच होऊन जाते
ओठांवरी कायम कुणाचे गार्‍हाणे वसते
औषध मुळीही काम ना करते
प्रार्थना सुद्धा मुळीही ना फळते
विष जाणून का तरीही सर्व पितात
जाणे का लोक तरीही प्रेम करतात

महबूब से हर ग़म मनसूब होता है
दिन रात उल्फ़त में तमाशा खूब होता है
रातों से भी लम्बे ये प्यार के किस्से
आशिक़ सुनाते हैं जफ़ा--यार के क़िस्से
बेमुरव्वत है वो, बेवफ़ा है वो
उस सितमगर का अपने दिलबर का
नाम ले ले के दुहाई दिया करते हैं
जाने क्यों लोग मुहब्बत किया करते हैं

प्रियकर असण्याने, हर दुःख साहवे
दिनरात तगमग ही, तयाच्या ओढीने होते
रातीहुनी मोठे हे, प्रीतरीतीचे किस्से
प्रेमिकही सांगत ते, भंगल्या निष्ठेचे किस्से
ना भीड त्याला आहे, ना असे निष्ठा
गुन्हेगाराचे, त्या दिलवराचे
नाव घे-घेऊन दूषणे देत
जाणे का लोक तरीही प्रेम करतात