मूळ हिंदी गीतः मजरूह, संगीतः चित्रगुप्त, गायकः किशोर
चित्रपटः एक राज़, सालः १९६३, भूमिकाः किशोर, जमुना
नरेंद्र गोळे २००८०५१६
पायल वाली देखना
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पैंजणवाले जप जरा
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लचकत चमकत चलत कामिनी
दधिगुन दमकत चपल दामिनी
ओ बाँवरी ओ साँवरी, अरी ओ चंचल
पल-छिन रुक जा, रुक जा रुक जा
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लचकत मुरडत चाले कामिनी
दिपवत चमकत चपळ दामिनी
वो बावळी ओ सावळी अगं ए चंचल
क्षणभर थांब ना थांब ना थांब ना
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॥
धृ
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पायल वाली देखना, यहीं पे कहीं दिल है,
पग तले आये ना
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पैंजणवाले जप जरा, इथेच कुठे मन आहे,
पायतळी येवो ना
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॥
१
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जैसे दामनिया बदरा में उड़े
कुछ दूर चले फिर जा के मुड़े
उठा रे नयन कजरारे
पर इतना समझ ले किसी की लगे हाये
न
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जशी दामिनी ती, मेघांतून
उडे
थोडी चाले पुढे, हलकेच
वळे
उचल ए, नयन
तव काळे
पण एवढे समज की, कुणाची
लागो हाय ना
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॥
२
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कित झूम चली मदिरा सी पिये
मतवारी पवन अचरा में लिये
ज़माना है यूँ ही मस्ताना
देखो जी कहीं ऋत बिना काली घटा
छाये न
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कुठे जाशी अशी मदिराशी पिऊन
मदमस्त पवन पदरात भरून
आहे सारे जगच मस्तीभरे
पाहा पण कधी, ऋतुआधी, रात काळी, येवो ना
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॥
३
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कहीं ऐसा न हो कोई बात बने
अँगड़ाई मेरी तेरा नाच बने
नाचो री न बन के चकोरी
घूँघर कहीं धड़कन मेरी बन जाये न
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कधी ऐसे न हो, काही
गोष्ट घडे
फिरकी ही माझी, तुझा
नाच बने
नाच ना, ना
बनून चकोरी
घुंगरू कधी, स्पंदन
माझे, होवोत ना
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