मूळ हिंदी गीतः शैलेंद्र, संगीतः
शंकर-जयकिसन, गायकः लता, मन्ना डे
चित्रपटः चोरी चोरी, सालः १९५४,
भूमिकाः राज कपूर, नर्गीस
मराठी अनुवादः नरेंद्र गोळे २०२३०५२२
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धृ
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ये रात भीगी भीगी,
ये मस्त फिजायें तू चाल धीरे धीरे,
वो चाँद प्यारा प्यारा क्यों आग सी लगा के
गुमसुम है चांदनी सोने भी नहीं देता,
मौसम का ये इशारा
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ही रात्र सर्द ओली, बहारही मस्त ही हळू चाल लाडक्या रे, चंद्रा खुशीखुशी का आग लावूनीही, गुपचुप हे चांदणे झोपूही न का देई, ऋतूचा खुला पुकारा
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१
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इठलाती हवा,
नीलम सा गगन कलियों पे ये बेहोशी की
नमी ऐसे में भी क्यों बेचैन
है दिल जीवन में न जाने क्या है
कमी
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अवखळ ही हवा, निळे हे गगन कळ्यांवर धुंद जणू चढली अशातही मन का अशांत असे न जाणे जीवनी काय कमी
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२
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जो दिन के उजाले में न
मिला दिल ढूंढें ऐसे सपने को इस रात की जगमग में डूबी मैं ढूंढ रही हूँ अपने
को
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जे स्वप्न न दिवसा उजेडी मिळे ते स्वप्न हुडकते मन का रे रात्रीच्या या चमचमाटामधे शोधत मी आपले लोक असे
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३
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ऐसे में कहीं क्या कोई
नहीं भूले से जो हमको याद करे एक हल्की सी मुस्कान से
जो सपनों का जहां आबाद करे
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चुकूनही का न कुणी मजला ऐशा अवस्थेत याद करे एका अस्फुट स्मितानेही न का स्वप्नांचे करे कुणी जग जागे
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