मूळ हिंदी गीतः मजरूह सुलतानपुरी, संगीतः सचिनदेव बर्मन, गायकः आशा, किशोरकुमार
चित्रपटः नै दो ग्यारह,
सालः १९५७, भूमिकाः देव आनंद, कल्पना कार्तिक
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धृ
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आँखों
में क्या जी रुपहला
बादल बादल में
क्या जी किसी का
आँचल आँचल में
क्या जी अजब सी
हलचल
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डोळे काय बघती रुपेरी जलधर त्यातहि काय आहे नवतीचा पदर पदरात काय आहे चाहुली कुतुहल
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१
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रंगीं
है मौसम तेरे दम
की बहार है फिर भी
है कुछ कम बस तेरा
इंतज़ार है देखने
में भोले हो पर हो
बड़े चंचल
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रंगीत ऋतू आहे तुझ्यामुळेच ही बहार उणे तरीही काय बस तुझीच आहे वाट वाटसी भोळा तरीहि आहेस तू अचपळ
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२
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झुकती
हैं पलकें झुकने
दो और झूम के उड़ती हैं
ज़ुल्फें उड़ने दो
होंठ चूम के देखने
में भोले हो पर हो
बड़े चंचल
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झुकती पापण्या झुकू दे
नाचनाचुनी उडती केसही हे उडू दे ओठ
चुंबुनी वाटसी भोळा तरीहि आहेस तू अचपळ
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३
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झूमें
लहराएं नयना मिल
जाये नैन से साथी बन
जाएं रस्ता
कट जाये चैन से देखने
में भोले हो पर हो
बड़े चंचल
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डोळे हे बघती भेटती नयना हे नयन साथीच होऊ देत वाट होईल सुखकर ही वाटसी भोळी तरीहि आहेस तू अचपळ
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https://www.youtube.com/watch?v=beF9TC8FY_M