मूळ हिंदी गीतकारः शैलेंद्र, संगीतः शंकर-जयकिसन, गायकः तलत
महमूद
चित्रपटः दाग, सालः १९५२, भूमिकाः दिलीपकुमार, निम्मी,
उषाकिरण
मराठी अनुवादः नरेंद्र गोळे २०११०६३०
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धृ
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ऐ मेरे दिल कहीं
और चल गम की दुनिया से
दिल भर गया ढुंढ ले अब कोई घर
नया
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ए मना तू कुठे दूर चल दुःखी जीवनास जीव ऊबला आसरा बघ आता तू नवा
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१
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चल जहाँ गम के
मारे न हो झुठी आशा के
तारे न हो झुठी आशा के
तारे न हो उन बहारों से
क्या फायदा जिस में दिल की
कली जल गई जख्म फिर से हरा
हो गया
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चल जिथे त्रासले कुणी नसो खोट्या आशेचे तारे न हो खोट्या आशेचे तारे न हो त्या बहारीचा काय फायदा मन-कळी जीत कोमेजली घाव पुन्हा नवा जाहला
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२
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चार ऑसू कोई रो
दिया फेर के मुँह कोई
चल दिया फेर के मुँह कोई
चल दिया लुट रहा था किसी
का जहाँ देखती रह गयी ये
जमीं चुप रहा बेरहम
आसमाँ
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चार अश्रू कुणी ढाळले तोंड फिरवून कुणी चालले तोंड फिरवून कुणी चालले जग कुणाचे हिरावत होते पाहतच राहिली ही जमीन निर्दयी नभहि चुप राहिले
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http://www.youtube.com/watch?v=_aFqiq7yHI8