मूळ हिंदी गीतः शैलेंद्र, संगीतः शंकर जयकिसन, गायकः मन्ना डे
चित्रपटः सीमा, सालः १९५५, भूमिकाः नूतन, बलराज साहनी
मराठी अनुवादः नरेंद्र गोळे २०१५०९२३
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धृ
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तू
प्यार का सागर है तेरी
इक बूँद के प्यासे हम लौटा
जो दिया तुमने चले
जायेंगे जहां से हम
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तू प्रेमाचा सागर अन् तुझ्या थेंबास तहानलो मी परतवशी जरी का तू हे जग जाईन सोडुनी मी
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१
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घायल
मन का पागल पंछी उड़ने
को बेक़रार पंख
हैं कोमल, आँख है धुँधली जाना
है सागर पार अब
तू ही इसे समझा राह
भूले थे कहाँ से हम
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जखमी मनाचा, वेडा पक्षी उडण्यासाठी अधीर पंखही कोमल, भरले डोळे जाणे आहे पैलतीरी आता तूच याला समजाव चुकलो पथ कुठुनी आम्ही
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२
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इधर
झूम के गाये ज़िंदगी उधर
है मौत खड़ी कोई
क्या जाने कहाँ है सीमा उलझन
आन पड़ी कानों
में ज़रा कह दे कि
आएँ कौन दिशा से हम
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इथे नाचते, गाते
हे जीवन तिथे आहे मृत्यू परी कुणास ठाऊक कुठे ही सीमा अडचण हीच उभी कानात जरा तू सांग की येऊ दिशेनि कुठल्या मी
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