२०२६-०७-०२

गीतानुवाद-३३२: तू प्यार का सागर है

मूळ हिंदी गीतः शैलेंद्र, संगीतः शंकर जयकिसन, गायकः मन्ना डे
चित्रपटः सीमा, सालः १९५५, भूमिकाः नूतन, बलराज साहनी 

मराठी अनुवादः नरेंद्र गोळे २०१५०९२३

धृ

तू प्यार का सागर है
तेरी इक बूँद के प्यासे हम
लौटा जो दिया तुमने
चले जायेंगे जहां से हम

तू प्रेमाचा सागर अन्‌
तुझ्या थेंबास तहानलो मी
परतवशी जरी का तू
हे जग जाईन सोडुनी मी

घायल मन का पागल पंछी
उड़ने को बेक़रार
पंख हैं कोमल, आँख है धुँधली
जाना है सागर पार
अब तू ही इसे समझा
राह भूले थे कहाँ से हम

जखमी मनाचा, वेडा पक्षी
उडण्यासाठी अधीर
पंखही कोमल, भरले डोळे
जाणे आहे पैलतीरी
आता तूच याला समजाव
चुकलो पथ कुठुनी आम्ही

इधर झूम के गाये ज़िंदगी
उधर है मौत खड़ी
कोई क्या जाने कहाँ है सीमा
उलझन आन पड़ी
कानों में ज़रा कह दे
कि आएँ कौन दिशा से हम

इथे नाचते, गाते हे जीवन
तिथे आहे मृत्यू परी
कुणास ठाऊक कुठे ही सीमा
अडचण हीच उभी
कानात जरा तू सांग
की येऊ दिशेनि कुठल्या मी