मूळ हिंदी गीत: राजिन्दर किशन, संगीत: मदन मोहन, गायक: लता
चित्रपट: संजोग, साल: १९६१, भूमिका: प्रदीपकुमार, आनिता गुहा, शुभा खोटे
मराठी अनुवाद: नरेंद्र गोळे २००६१००१
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धृ
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वो भूली दास्तां लो फिर याद आ गयी
नज़र के सामने घटा सी छा गयी
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विसरलेली कथा, पुन्हा पहा आठवली
डोळ्यांपुढती जणू, रात्रीगत विखुरली
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॥
१
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कहाँ से फिर चले आये,
ये कुछ भटके हुए साये
ये कुछ भूले हुए नग़मे
जो मेरे प्यार ने गाये
ये कुछ बिखरी हुई यादें,
ये कुछ टूटे हुए सपने
पराये हो गये तो क्या
कभी ये भी तो थे अपने
न जाने इनसे क्यों मिलकर
नज़र शर्मा गयी
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कुठुनशा त्या परत आल्या,
सावल्या त्या हरपलेल्या
विसरलेली गिते काही
गायीलेली जी प्रेमाने
विखुरलेल्या ह्या आठवणी,
भंगलेली काही स्वप्ने
झाली परकी तरी पण जी
कधी होती परी आपली
न जाणे ह्यांना का भेटून
नजर ही लाजली
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॥
२
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उम्मीदों के हँसी मेले,
तमन्नाओं के वो रेले
निगाहों ने निगाहों से,
अजब कुछ खेल से खेले
हवा में ज़ुल्फ़ लहराई,
नज़र पे बेखुदी छाई
खुले थे दिल के दरवाज़े,
मुहब्बत भी चली आई
तमन्नाओं की दुनिया पर
जवानी छा गयी
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आशेचे लाघवी मेळे,
उमेदींचे ते काफिले
डोळ्यांनी डोळ्यांशी सारे,
अजबसे खेळ खेळले
केस उडले हवेवर अन्,
धुंद नजरेवरी आली
मनाची पाहुनी उघडी
कवाडे, प्रेमही शिरले
आकांक्षेच्या जगावर त्या
तरूणता दाटली
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॥
३
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बड़े रंगीन ज़माने थे,
तराने ही तराने थे
मगर अब पूछता है दिल
वो दिन थे या फ़साने थे
फ़क़त इक याद है बाकी
बस इक फ़रियाद है बाकी
वो खुशियाँ लुट गयी लेकिन
दिल-ए-बरबाद है बाकी
कहाँ थी ज़िन्दगी मेरी
कहाँ पर आ गयी
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किती रंगीत दिवस होते,
गितांचे ताटवे होते
विचारे मन आता हे की
दिवस होते खरे का ते?
फक्त एक याद आहे बाकी,
एक फिर्याद आहे बाकी
आटले सौख्य ते तरीही,
ध्वस्त हे हृदय आहे बाकी
कुठे हे आयुष्य होते
आले ते कुठवरी
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